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मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग परिचय
 

मध्यप्रदेश के अल्पसंख्यक वर्गों के संवैधानिक, सामाजिक और आर्थिक हितों की रक्षा तथा उनके बहुमुखी विकास के प्रति लगातार जागरूकता के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग 30 अप्रैल, 1982 को गठित किया गया। वर्ष 1992 में इसे मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में शामिल कर दिया गया। फरवरी 1994 में मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग पुनः अस्तित्व में आया और मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1996 पारित किया गया और आयोग को विधि स्थापित आयोग का दर्जा प्राप्त हुआ।



मध्यप्रदेश राज्य में निम्न छह धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यक घोषित किया गया हैः-

1. मुस्लिम 2. सिख 3. ईसाई 4. बौद्ध 5. जैन 6. पारसी
 
आयोग का ढांचा

अध्यक्ष
सदस्य-1 सदस्य-2 सदस्य-3 सदस्य-4
धारा-3(2) अंर्तगत आयोग एक अध्यक्ष और 4 सदस्यों से मिलकर बनेगा जिसमें अध्यक्ष तथा एक सदस्य अल्पसंख्यक समुदायों से होंगे ।
 

प्रशासनिक ढांचा


सचिव


अनुभाग अधिकारी
अनुसंधान अधिकारी


कनिष्ठ लेखाधिकारी
निज सचिव स्टेनोग्राफर


सहायक वर्ग-1 (एकल)
सहायक वर्ग-2 (दो पद)
सहायक वर्ग-3 (चार पद)


दफ्तरी-1
भृत्य (तीन पद)
 
प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था

सचिव के पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा या मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी पदस्थ होते हैं, जिन पर आयोग के समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों के निर्वाह का दायित्व होता है। उन्हें आयोग की प्रशासनिक और वित्तीय गतिविधियों के संचालन के लिए आयोग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सहायता/सहयोग दिया जाता है। आयोग के आहरण वितरण के अधिकार अनुभाग अधिकारी को सौंपे गए हैं। आयोग को प्रतिवर्ष उसका खर्च चलाने के लिये शासन से वार्षिक बजट प्राप्त होता है जिसका व्यय लेखा आयोग द्वारा प्रतिवर्ष शासन को प्रस्तुत किया जाता है। संचालक, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण आयोग के बजट नियंत्रणकर्ता अधिकारी हैं।

अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने का विशेषाधिकार

चूंकि आयोग मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा पारित मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम-1996 के तहत गठित संस्था है, जिसे नियम 8.2 के तहत अपनी प्रक्रिया स्वयं ही विनियमित करने का अधिकार है। अतः आयोग की नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रथक से कोई समिति, उप-समिति या मण्डल नहीं है, जिनकी सहायता से आयोग की गतिविधियों का संचालन होता हो। आयोग की प्रतिमाह होने वाली मासिक बैठक में आयोग उपरोक्त अधिनियम के अंतर्गत की जाने वाली कार्यवाही के लिए स्वयं निर्णय लेता है। अलग से आयोग की समितियां, परिषदें और मण्डल नहीं हैं, जिनकी कार्यवाही आम जनता के लिए उपलब्ध रहती हो या जो गोपनीयता की सीमा में न आती हों। आयोग अधिनियम 1996 के अंतर्गत अपनी कार्यवाही का संचालन करता है जिनकी प्रक्रिया वह स्वयं निर्धारित करता है।